जब तक तंत्र पर विधिवत चर्चा शुरू नहीं होती मैं भोजपुरी का एक शाबर मंत्र अधूरे रूप में यहां रख रहा हूं। पूरा मंत्र ब्लाग पर मिलेगा। इसे सिद्ध करने की आवश्यकता नहीं हैं। यह स्वयं सिद्ध है। जरा आप अपनी समझने की आदत को बदल कर समझने का प्रयास करें। यह मंत्र बिना पूरे अनुष्ठान को जाने शायद समझ में न आये। इसका प्रयोग घर की बड़ी-बूढ़ी औरतें झल्लाये बच्चे को शांत करने के लिये करती रही हैं। आधुनिक शिक्षा वाली पीढ़ी को यह ऊटपटांग लगता है। इसलिये यह प्रयोग लुप्त हो रहा है-। इस अनुष्ठान में एक दीपक, घर में चूल्हा लीपने वाला पोतन मूल अवश्यक सामग्री होती है। उसमें भी मूलतः दीपक। घर की बुजुर्ग महिला रोता हुआ बच्चा और उसे गोद में संभालने वाली औरत। मंत्र है- ‘‘आको माई चाको, कुलदीप माई माको। जिन मोरा बबुआ के नजरी लगइहें, बियाये के बियइहें, बेंगुची बियइहें, डाल दीहें पानी में छपकत जइहें।’’
मैं ने कई महिलाओं को खाश कर अपनी परदादी को इसका सफल प्रयोग करते हुए देखा है।
तंत्रविषयक इस ब्लॉग के चार आलेखों को आज पढ़ने का अवसर मिला।विद्युत देवी और सर्वरदेवता प्रायः रुष्ट ही रहते हैं।आज थोड़े प्रसन्न हुए तो यह लाभ ले पाया।प्रियवर रविन्द्रजी का प्रयास और कार्य अति सराहनीय प्रतीत हुआ।मुझे भी अवसर निकाल कर इनका अधिकाधिक सानिध्य लाभ लेने का लोभ जग रहा है।इस पुनीत कार्य के लिए पाठकजी को साधुवाद।
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हटाएं‘‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ में रुचि लेने वाले लोगों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इंटरनेट पर फेसबुक की तकनीकी समस्याओं, जैसे किसी के कंप्यूटर पर खुलना , न खुलना, अलग अलग जगहों पर अलग अलग टिप्पणियों का बिखर जाना, आदि समस्याओं का या तो समाधान बतायें या सीधे ब्लाग पर ही आकर अपना विचार रखें। यदि इसमें किसी को कोई दुविधा हो या यहां भी कोई रहस्य हो, जिसे मैं समझ नहीं पा रहा तो कृपया अपने खुलेपन के साथ सहानुभूतिपूर्वक बतायें कि मैं समझ सकूं। pranaam, dhanyavaad