‘‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ की तकनीकी एवं अन्य उलझनें
1 ‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ में रुचि लेने वाले लोगों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इंटरनेट पर फेसबुक की तकनीकी समस्याओं, जैसे किसी के कंप्यूटर पर खुलना , न खुलना, अलग अलग जगहों पर अलग अलग टिप्पणियों का बिखर जाना, आदि समस्याओं का या तो समाधान बतायें या सीधे ब्लाग पर ही आकर अपना विचार रखें। यदि इसमें किसी को कोई दुविधा हो या यहां भी कोई रहस्य हो, जिसे मैं समझ नहीं पा रहा तो कृपया अपने खुलेपन के साथ सहानुभूतिपूर्वक बतायें कि मैं समझ सकूं।
2 फेसबुक पर ‘‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ विषयक जो भी चर्चा चली, टिप्पणियां आईं उन्हे मैं ने तंत्र परिचय ब्लाग ेंके एक स्वतंत्र पृष्ठ ..... पर संकलित करके डाल दिया है। वहां पर सबकी बातें एक साथ देखी-पढ़ी जा सकेंगी। जो भी व्यक्ति अपनी किसी बात को पूर्णतः निजी एवं गुप्त रखना चाहते हों, वे या तो प्रगट ही न करें या व्यक्तिगत मेल से चर्चा करें- मेरा मेल आइ.डी है-
3 तंत्र सबसे पहले मर्यादा की शर्त रखता है। समूह में होनेवाली चर्चा में उतनी उत्सुकता नहीं होती। शाबर मंत्र के अंदरूनी रहस्य क्या कोई बच्चा-बच्ची समझेगी? यह 18 साल में बालिग होने वाली कानूनी प्रौढ़ता से क्या हम सहमत हैं?
4 आप लोग कैसे सवाल पूछेंगे, विचार व्यक्त करेंगे? अगर प्रश्न और विचार ही कुंठित रह गये तो चर्चा कैसे होगी? मेरा एक सुझाव है- यह चर्चा चूंकि केवल और केवल तथ्य परक होनी है अतः रोचकता, साहित्यिकता, वर्णन में सरसता सौंदर्य आदि की अपेक्षा न करें। विषय वस्तु ही ऐसा है कि सीधे स्पष्ट वर्णन के बाद भी रहस्य, रोमांच तथा अंत में अगाध शांति तथा तृप्ति देनेवाला होगा।
5 कोई खुले न खुले मुझसे लच्छेदार शास्त्रीय संदर्भों से भरी पूरी जटिल अभिव्यक्ति की आशा न रखें। मेरा प्रयास होग कि एक अनपढ़ को भी जब ये बातें बताई जायें तो वह समझ ले। आप लोग तो पढ़े लिखे हैं। नये जमाने के छोटे बच्चों को ऐसी बातों में रुचि ही नहीं होती। आगे से मैं भी अरोचक और सीधी सरल शैली में ही गंभीर तथा महत्त्वपूर्ण बातों को लिखूंगा। सरलता गोपनीयता का सरल उपाय है।
1 ‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ में रुचि लेने वाले लोगों से मेरा विनम्र अनुरोध है कि वे इंटरनेट पर फेसबुक की तकनीकी समस्याओं, जैसे किसी के कंप्यूटर पर खुलना , न खुलना, अलग अलग जगहों पर अलग अलग टिप्पणियों का बिखर जाना, आदि समस्याओं का या तो समाधान बतायें या सीधे ब्लाग पर ही आकर अपना विचार रखें। यदि इसमें किसी को कोई दुविधा हो या यहां भी कोई रहस्य हो, जिसे मैं समझ नहीं पा रहा तो कृपया अपने खुलेपन के साथ सहानुभूतिपूर्वक बतायें कि मैं समझ सकूं।
2 फेसबुक पर ‘‘तंत्र पर खुली चर्चा’’ विषयक जो भी चर्चा चली, टिप्पणियां आईं उन्हे मैं ने तंत्र परिचय ब्लाग ेंके एक स्वतंत्र पृष्ठ ..... पर संकलित करके डाल दिया है। वहां पर सबकी बातें एक साथ देखी-पढ़ी जा सकेंगी। जो भी व्यक्ति अपनी किसी बात को पूर्णतः निजी एवं गुप्त रखना चाहते हों, वे या तो प्रगट ही न करें या व्यक्तिगत मेल से चर्चा करें- मेरा मेल आइ.डी है-
3 तंत्र सबसे पहले मर्यादा की शर्त रखता है। समूह में होनेवाली चर्चा में उतनी उत्सुकता नहीं होती। शाबर मंत्र के अंदरूनी रहस्य क्या कोई बच्चा-बच्ची समझेगी? यह 18 साल में बालिग होने वाली कानूनी प्रौढ़ता से क्या हम सहमत हैं?
4 आप लोग कैसे सवाल पूछेंगे, विचार व्यक्त करेंगे? अगर प्रश्न और विचार ही कुंठित रह गये तो चर्चा कैसे होगी? मेरा एक सुझाव है- यह चर्चा चूंकि केवल और केवल तथ्य परक होनी है अतः रोचकता, साहित्यिकता, वर्णन में सरसता सौंदर्य आदि की अपेक्षा न करें। विषय वस्तु ही ऐसा है कि सीधे स्पष्ट वर्णन के बाद भी रहस्य, रोमांच तथा अंत में अगाध शांति तथा तृप्ति देनेवाला होगा।
5 कोई खुले न खुले मुझसे लच्छेदार शास्त्रीय संदर्भों से भरी पूरी जटिल अभिव्यक्ति की आशा न रखें। मेरा प्रयास होग कि एक अनपढ़ को भी जब ये बातें बताई जायें तो वह समझ ले। आप लोग तो पढ़े लिखे हैं। नये जमाने के छोटे बच्चों को ऐसी बातों में रुचि ही नहीं होती। आगे से मैं भी अरोचक और सीधी सरल शैली में ही गंभीर तथा महत्त्वपूर्ण बातों को लिखूंगा। सरलता गोपनीयता का सरल उपाय है।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें