मंगलवार, 12 नवंबर 2013

काम


उलटे क्रम में मोक्ष के बाद काम आता है। काम सर्वाधिक विवादास्पद, आखिर क्यों? क्योंकि सर्वाधिक आकर्षक है। इस संसार में अधिकांश लोगों के लिये काम के प्रति आकर्षण और विकर्षण दोनों प्रचुर पाया जाता है। काम शब्द से यहां मतलब कल्पना सुख को छोड़ कर मुख्य रूप से विपरीत लिंगी के साथ मिलने वाला सुख है। साथ ही विभिन्न साधना विधियों द्वारा बिना विपरीत लिंगी के सहयोग के भी अपने भीतर स्थित कामानंद जी हां कामानंद के अविरल गहन ओर असीम स्रोत के साथ एकाकार होना है । इसका महत्त्व इसलिये है कि यह----
1    सृष्टि का मूल है, यह सहज नैसर्गिक है
2    विवाह के रूप में इससे व्यवस्था और आरंभिक सत्ता का आरंभ होता है,
3    प्राकृतिक रूप से इसकी गहनता अन्य सांसारिक सुखों से अघिक किंतु क्षणिक होती है, इसलिये यह आकर्षण और बेचैनी दोनो पैदा करता है,
5    अपनी सहजता के कारण अनेक बार यह व्यवस्था और सत्ता के बंधनों को नहीं मानता अतः नैतिकतावादियों और अतिवादियों को इससे नफरत है और समाजप्रेमी बहुसंख्यक लोग इसे अपनाते तथा जीते हैं,
6    भारत के साधकों ने इसके रहस्य को समझा, इसकी क्षणिकता के कारणों की पड़ताल की और बताया कि कैसे इसे ठीक से पहचानें, अपनायें और अतृप्ति तथा बेचैनी से छुटकारा पाकर संतुष्ट ही नहीं हो अपितु आनंद के अविरल, गहन ओर असीम स्रोत के साथ एकाकार हों
7    ऐसे लोगों को गुमराह करना आसान नहीं है क्योंकि वे अनुभवी भी होते हैं और बहुसंख्यक समाज के साथ चलने के कारण सुरक्षित भी। रूढि़यों के विरुद्ध बोलने के कारण राजा] धर्माचार्य और धर्म के नाम पर पाखंड करने वाले तीनों ऐसे साधकों के शत्रु बन जाते हैं।
8    यह मेरी कोई कल्पना नहीं बहुत कुछ आपका भी भोगा हुआ सत्य हो सकता है।

     मैं अपनी बात क्रमशः रखूंगा और प्रयास करूंगा कि वह अनावश्यक गोपनीयता] भारी भरकम गूढ़ शब्दों के बोझ से लदा न हो।

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